उपजा का संघर्षपूर्ण इतिहास रहा है: दादा पी.के.राय

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लख़नऊ। उ.प्र.जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) की प्रांतीय इकाई द्वारा “श्रमिक दिवस” पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में श्रमजीवी पत्रकारों की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला गया। सञ्चालन वरिष्ठ पत्रकार वीरेश तरार ने किया।
कैसरबाग बरादरी स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में
उ.प्र. सरकार के राज्यमंत्री (स्वतन्त्र प्रभार) गन्ना विकास एवं चीनी मिलें एवं अलीगढ़ जनपद के प्रभारी सुरेश राणा ने उपस्थित पत्रकार बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार गंभीर है। प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश को सही मायने में उत्तम प्रदेश बनाने के लिए भरसक प्रयास कर रही है। पहले उप्र के नागरिक को देश के किसी अन्य स्थान पर उचित सम्मान नहीं  मिलता था। लेकिन अब उप्र का नागरिक अब चाहे वह देश के किसी भी कोने में रहता हो, उसका पूरा सम्मान किया जाता है। श्री राणा ने प्रदेश के कोने कोने से आये पत्रकारों से आह्वान किया कि यदि आपको कहीं कुछ गलत दिखता है तो  उसे अपनी लेखनी से निर्भीकता से सरकार तक अवश्य पहुंचाए। और यदि कहीं आपको सरकार का अच्छा कार्य दिख रहा है, तो उसे भी लेखनी द्वारा जनता तक अवश्य पहुचाएं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि पत्रकार निर्भीक होकर अपने कार्य को ईमानदारी से कार्य करें। कोई भी किसी भी पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार नहीं कर सकता। यदि किसी पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार करता है तो ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने प्रदेश महामन्त्री प्रदीप शर्मा और उपजा के लख़नऊ संयोजक वरिष्ठ पत्रकार वीरेश तरार का आभार व्यक्त किया।

इससे पूर्व उपजा के जनक एवं एन यूजे आई के पूर्व राष्ट्रिय अध्यक्ष सर्वमान्य दादा पी.के.रॉय, उपजा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जे.पी. शुक्ला, वरिष्ठ स्तंभकार राजनाथ सिंह सूर्य ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया।
श्रमिक दिवस पर अपने उद्बोधन में जे.पी. शुक्ला ने कहा कि वर्तमान में श्रमजीवी पत्रकारों का हर जगह शोषण किया जा रहा है। अखबार मालिकान विज्ञापनों का बड़ा लक्ष्य पूरा करने के लिए अनर्गल दवाब बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाजहित के लिए पत्रकारों को एकजुट रहना
आवश्यक है। हम लोगों को आज के दिन मंथन कर समाजहित में कार्य करने की आवश्यकता है।
वरिष्ठ स्तंभकार राजनाथ सिंह सूर्य ने अपने उद्बोधन में मई दिवस पर प्रकाश डाला। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि मई दिवस मनाया क्यों जाता है। जबकि इसका इतिहास कुछ और बताता है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मई महीने की पहली तारीख को मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस को ‘मई दिवस’ भी कहकर बुलाया जाता है।
श्री सूर्य ने कहा कि वर्ष 1886 में 4 मई के दिन शिकागो शहर के हेमार्केट चौक पर मजदूरों का जमावड़ा लगा हुआ था। मजदूरों नें उस समय आम हड़ताल की हुई थी। हड़ताल का मुख्य कारण मजदूरों से बेहिसाब काम कराना था। मजदूर चाहते थे कि उनसे दिन भर में आठ घंटे से अधिक काम न कराया जाए। मौके पर कोई अप्रिय घटना ना हो जाये इसलिये वहाँ पर स्थानीय पुलिस भी मौजूद थी। तभी अचानक किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भीड़ पर एक बम फेंका गया। इस घटना से वहाँ मौजूद शिकागो पुलिस नें मजदूरों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिये एक्शन लिया और भीड़ पर फायरिंग शुरू कर दी। इस घटना में कुछ प्रदर्शनकारीयों की मौत हो गयी। मजदूर वर्ग की समस्या से जुड़ी इस घटना नें समग्र विश्व का ध्यान अपनी और खींचा था।
इसके बाद 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन (the International Socialist Conference ) में ऐलान किया  गया कि हेमार्केट नरसंघार में मारे गये निर्दोष लोगों की याद में 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन सभी कामगारों व श्रमिकों का अवकाश रहेगा।
श्री सूर्य ने कहा कि पत्रकार को अपनी लेखनी में धार और जीवन में सद व्यवहार बनाये रखना चाहिए।
अध्यक्षता कर रहे एन यू जे आई के पूर्व राष्ट्रिय अध्यक्ष दादा पी. के.रॉय ने उपजा की उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि उपजा का इतिहास संघर्ष पूर्ण रहा है। लख़नऊ में श्रमिक दिवस मनाने की शुरुआत उपजा ने ही की थी। मान्यताप्राप्त पत्रकारों को सरकारी बसों में  निशुल्क यात्रा की सुविधा, सभी सरकारी अस्पतालों में निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपजा की ही देन है। वर्तमान में उपजा ने सरकार से पूर्व पत्रकारों को पेंशन दिए जाने की भी मांग की है।
कार्यक्रम संयोजक एवं प्रदेश महामन्त्री प्रदीप शर्मा ने कहा कि निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे पत्रकारों को सरकारों द्वारा सुरक्षा व सुविधायें मुहैया कराना चाहिए। पत्रकारिता समाज में फैली बुराईयों को उजागर करती है। हमारी किसी से भी व्यक्तिगत बुराई भलाई नहीं होती है। हम समाज के सजग प्रहरी के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
उपजा के लख़नऊ संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार वीरेश तरार ने कहा कि हम सब संगठन के लिए कार्य कर रहे हैं। हमारा मकसद सबको साथ लेकर संगठन को ऊंचाइयों पर ले जाना है।
उपजा के प्रदेश कोषाध्यक्ष सचिन भारद्वाज ने कहा कि उपजा पत्रकारों के हितों के लिए तो निरन्तर संघर्ष कर रही है, साथ ही हम सबको अपने अपने जनपदों में सामाजिक कार्यों में भी प्रमुख भागीदारी करनी चाहिए। गरीबों, मजदूरों एवं जरूरतमंदों की समस्याओं को प्रशासन एवं शासन स्तर से समाधान कराने का भी प्रयास करें। तभी सही मायने में श्रमिक दिवस की सार्थकता सिद्ध होगी।
इसके अलावा मंचासीन उपजा के प्रांतीय उपाध्यक्ष विनोद बागी, वरिष्ठ पत्रकार डॉ मार्कंडेय मिश्रा, मंत्री सुनील त्रिवेदी, विनोदपाल सिंह, हाजी एम् सगीर, शिवशंकर गुप्ता, पंकज वालिया, आशीष गुप्ता, विश्वबंधु शास्त्री, राज सिंह मालिक, मनीष श्रीवास्तव, राजेश सिंह आदि ने भी श्रमिक दिवस पर अपने अपने विचार व्यक्त किया।
इस अवसर पर बदायूं, अलीगढ, सहारनपुर, मेरठ, शामली, बागपत, वाराणसी, सुल्तानपुर, गोंडा, बहराइच, राय बरेली, लख़नऊ, प्रतापगढ़, गाजियाबाद आदि अनेक जिलों से उपजा के जिलाध्यक्ष, महामन्त्री, कोषाध्यक्ष सहित जिला कार्यकारिणी के समस्त पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
अंत में सभी जिला इकाइयों द्वारा सभी सम्मानित अतिथियो का शाल ओढ़ाकर और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।

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