नमामि गंगे योजना पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी प्रदूषण की मात्रा बढ़ी

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डॉ. अनिल कुमार ,नई दिल्ली!!

नमामि गंगे योजना पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी प्रदूषण की मात्रा बढ़ी नमामि गंगे योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जून 2014 में हुई | जिसका उद्देश्य विभिन्न कार्यक्रमों के तहत जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण और पानी की गुणवत्ता, जलवाही स्तर की वृद्धि, कटाव कम करने और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति में सुधार करने के लिए 30,000 हेक्टेयर भूमि पर वन लगाने जैसे अनेक कार्यक्रम शामिल थे। देश में नमामि गंगे योजना तब सुर्खियों में आना शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना की शुरुआत के दौरान यह कहा ‘मुझे तो मां गंगा मैया ने बुलाया है मैं स्वयं यहां नहीं आया हूं ‘| इस तरह के भावनात्मक वाक्य लोगों को आकर्षित करने के लिए इस्तेमाल किए थे| दूसरी बार सुर्खियों में तब आया जब चर्चित पर्यावरणविद प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल की 112 दिनों तक अन्न-जल त्याग करके अनशन के दौरान मौत हो गई थी | लेकिन सरकार ने प्रोफेसर की मौत के बाद भी गंगा नदी में बढ़ते हुए प्रदूषण की मात्रा को संज्ञान में नहीं लिया था| तीसरी बार तब सुर्खियों बनी जब कांग्रेस पार्टी की तरफ से प्रियंका गांधी ने अपने राजनीतिक चुनाव का बिगुल गंगा यात्रा से शुरू किया | चुनावी बिगुल के दौरान प्रियंका गांधी पर अनेक बीजेपी के बड़े नेताओं ने कटाक्ष करते हुए कहा हमने गंगा नदी पूरी तरह से साफ कर दी है तभी प्रियंका गांधी की गंगा यात्रा सम्भव हो पाई है | लेकिन जब दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के सह संयोजक डॉ अनिल कुमार ने नमामि गंगे योजना पर सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचना मांगी गई तो रिपोर्ट में सामने आया कि सरकार ने इस योजना को पूरा करने के लिए 221 प्रोजेक्ट के माध्यम से जून 2014 से 31 दिसंबर 2020 तक 20 हजार करोड रुपए खर्च करने के लिए आवंटित किए | रिपोर्ट में सामने आया कि योजना के शुरू होने के बाद 2016 तक औद्योगिक क्षेत्रों से गंगा नदी में 81% प्रदूषण की मात्रा बढ़ गई है | ‘नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल’ 2017 की रिपोर्ट के अनुसार इस योजना पर अब तक 7304.64 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी गंगा नदी के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा लगातार घट रही है और बैक्टीरिया की मात्रा 58 फीसदी से अधिक बढ़ चुकी है |
डॉ अनिल कुमार ने नमामि गंगे योजना पर कई सवाल खड़े किए हैं कहा है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी नदी में लगातार प्रदूषण की मात्रा बढना सीधा-सीधा भ्रष्टाचार की तरफ इशारा करता है | यह भी कहा कि नमामि गंगे योजना का भारतीय जनता पार्टी ने राजनीतिकरण करके खूब फायदा उठाया है लेकिन नदी की सफाई के लिए कोई भी कार्यक्रम सफल नहीं रहे हैं | सरकार ने अनेकों योजनाओं को प्रचारित प्रसारित करने के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों अरबों फूंक दिए लेकिन जमीनी धरातल पर काम कुछ भी नहीं हुआ | देश की जनता इन मुद्दों को चुनाव के समय जवाब देगी |

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