Exclusive: Pf Account Holders Withdraw Rs 99 Crore Rupees Savings In Three Months During Corona Period – Exclusive: कोरोना काल में पीएफ की बचत बनी सहारा, खाताधारकों ने तीन महीने में निकाले 99 करोड़ रुपये

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कोरोना काल में नौकरी गंवाने वाले लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि सहारा बनी। अप्रैल से लेकर अगस्त तक नौकरी जाने या आर्थिक परेशानी की वजह से उत्तराखंड में लोगों ने 99 करोड़ रुपये अपने पीएफ खातों से निकाले। देहरादून में ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय में ऐसे परेशान और जरूरतमंदों की भीड़ रोजाना उमड़ रही है।

सरकार ने कोरोना काल में लोगों की आर्थिक जरूरतों को देखते हुए कोविड-19 योजना शुरू की थी। इसके तहत तीन महीने के वेतन और डीए के बराबर रकम या पीएफ खाते में जमा कुल रकम का 75 प्रतिशत हिस्सा निकाला जा सकता है। इस योजना का अप्रैल से अगस्त के बीच में 39,394 लोगों ने लाभ लिया है।

योजना के तहत खातों से 53 करोड़ रुपये निकाले गए हैं। इसी प्रकार, नौकरी के बाद खातों का फाइनल सेटलमेंट करने वाले लोगों की संख्या में जबर्दस्त उछाल आया है। अप्रैल से अगस्त तक 61,725 लोगों ने पीएफ खाते का फाइनल सेटलमेंट किया है। इन लोगों ने खातों से 46 करोड़ रुपये निकासी की है।    

ईपीएफओ कार्यालय में इन दिनों काम का बहुत दबाव है। कोरोना की वजह से पूरे स्टाफ को नहीं बुला सकते, लेकिन काम दोगुना हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि कोरोना के बाद से अलग-अलग श्रेणियों में दावों की संख्या बढ़ रही है, जिनका निस्तारण करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

तेजी से बढ़ रहा है नौकरी जाने का आंकड़ा

देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आने वाली कंपनियों में तेजी से नौकरी जाने का आंकड़ा बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि जिस जिस हिसाब से पीएफ खातों का सेटलमेंट हो रहा है, वह बेरोजगारी की ओर इशारा कर रहा है।

नौकरी नहीं बची तो अब यही है सहारा

पीएफ कार्यालय में आंसू पोंछती नाजिया अंसारी से जब यहां आने की वजह पूछी गई तो उनका गला भर आया। वे बोलीं- साहब, कंपनी ने पांच महीने से घर बैठाया हुआ है। किराया चढ़ता जा रहा है। पीएफ से पैसा मिल जाएगा तो किराए दे दूंगी।

मुश्किल वक्त है, पीएफ से ही उम्मीदें

अजय थपलियाल ने बताया कि वे एक बड़ी कंपनी में काम करते थे। कोरोना आने के बाद हालात बिगड़ गए तो उनकी नौकरी भी नहीं रही। अब अपना पीएफ खाता बंद करा रहे हैं। इससे जो पैसा मिलेगा, उससे वह कोई और काम शुरू करने की कोशिश करेंगे।

सेलाकुई निवासी नीता भी पीएफ दफ्तर पहुंचीं थीं। उन्होंने बताया कि उनकी मां फैक्ट्री में नौकरी करती थीं। कोरोना संकट शुरू होने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। अब खर्चों के लिए पीएफ ही सहारा है। इसलिए वह पीएफ निकासी के लिए यहां आई हैं।

आर्थिक हालात सुधारने में मदद करेगा पीएफ

युवा नीरज कुमार शर्मा भी पीएफ कार्यालय पहुंचे। उनका कहना है कि वैसे तो नौकरी सलामत है, लेकिन कोरोना काल में आर्थिक संकट पैदा हो गया है। लिहाजा, कोविड-19 योजना के तहत वह अपना पैसा निकाल रहे हैं। इससे परिवार की जरूरतें पूरी हो जाएंगी।

सार

  • 61 हजार से ज्यादा लोगों ने नौकरी जाने पर बंद पर किया पीएफ खाता
  • 39 हजार से ज्यादा लोगों ने कोविड-19 योजना के तहत निकाली राशि
  • पीएफ दफ्तर के चक्कर काटने वालों की संख्या में हुआ जबर्दस्त इजाफा

विस्तार

कोरोना काल में नौकरी गंवाने वाले लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि सहारा बनी। अप्रैल से लेकर अगस्त तक नौकरी जाने या आर्थिक परेशानी की वजह से उत्तराखंड में लोगों ने 99 करोड़ रुपये अपने पीएफ खातों से निकाले। देहरादून में ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय में ऐसे परेशान और जरूरतमंदों की भीड़ रोजाना उमड़ रही है।

सरकार ने कोरोना काल में लोगों की आर्थिक जरूरतों को देखते हुए कोविड-19 योजना शुरू की थी। इसके तहत तीन महीने के वेतन और डीए के बराबर रकम या पीएफ खाते में जमा कुल रकम का 75 प्रतिशत हिस्सा निकाला जा सकता है। इस योजना का अप्रैल से अगस्त के बीच में 39,394 लोगों ने लाभ लिया है।

योजना के तहत खातों से 53 करोड़ रुपये निकाले गए हैं। इसी प्रकार, नौकरी के बाद खातों का फाइनल सेटलमेंट करने वाले लोगों की संख्या में जबर्दस्त उछाल आया है। अप्रैल से अगस्त तक 61,725 लोगों ने पीएफ खाते का फाइनल सेटलमेंट किया है। इन लोगों ने खातों से 46 करोड़ रुपये निकासी की है।    


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