Former Chief Minister Of Chhattisgarh Ajit Jogis Final Farewell With State Honors – राजकीय सम्मान के साथ जोगी को अंतिम विदाई, अंतिम संस्कार में शामिल थे मंत्री समेत कई वरिष्ठ नेता 

0
128


ख़बर सुनें

छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी का शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ ईसाई रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। जोगी का शुक्रवार को निधन हो गया था। बिलासपुर जिले के अधिकारियों ने बताया कि जिले के गौरला शहर के ज्योतिपुर स्थित ईसाई कब्रिस्तान में देर शाम जोगी के पार्थिव शरीर को दफनाया गया।

अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान कब्रिस्तान में जोगी की पत्नी रेणु जोगी, उनके बेटे अमित जोगी, उनकी पुत्रवधु ऋचा जोगी और अजीत जोगी के बड़े भाई एसआर जोगी मौजूद थे। वहीं रायपुर के बिशप और अन्य पादरियों ने जोगी के लिए प्रार्थना की।

उन्होंने बताया कि जोगी के अंतिम संस्कार के दौरान राज्य के आबकारी मंत्री कवासी लखमा, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

इससे पहले शनिवार सुबह जोगी के पार्थिव शरीर को रायपुर स्थित उनके निवास स्थान सागौन बंगले से बिलासपुर में उनके आवास मरवाही सदन ले जाया गया। जहां बिलासपुर के वरिष्ठ नेताओं और आमजनों ने उनके शव पर अपने श्रध्दासुमन अर्पित किए। वहीं रायपुर से बिलासपुर के रास्ते में अनेक गावों में लोगों ने जोगी के वाहन पर फूल बरसाए।

बाद में जोगी के पार्थिव शरीर को उनके गृहग्राम जोगीसार ले जाया गया। जहां ग्रामीणों और उनके क्षेत्र की जनता ने अपने नेता का अंतिम दर्शन किया। अंत में जोगी के शव को गौरेला लाया गया, जहां उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र थे। गौरेला के कब्रिस्तान में जोगी के शव को दफनाया गया।

अधिकारियों ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए बनाए गए नियमों के तहत केवल उनके करीबी परिवार के सदस्यों और गणमान्य लोगों ने ही कब्रिस्तान में प्रवेश किया था।

छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी का शुक्रवार को राजधानी रायपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। 74 वर्षीय जोगी की तबीयत बिगड़ने के बाद इस महीने की नौ तारीख को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

जोगी के परिवार में उनकी पत्नी कोटा क्षेत्र से विधायक रेणु जोगी तथा पुत्र पूर्व विधायक अमित जोगी और उनकी पुत्रवधु हैं। राज्य सरकार ने जोगी के निधन पर शुक्रवार से तीन दिन तक राजकीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और कोई भी शासकीय समारोह आयोजित नहीं किए जाएंगे।

भारतीय प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आए अजीत जोगी वर्तमान में मारवाही क्षेत्र से विधायक थे। उनकी पत्नी रेनु जोगी कोटा क्षेत्र से विधायक हैं। जोगी वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के दौरान यहां के प्रथम मुख्यमंत्री बने तथा वर्ष 2003 तक मुख्यमंत्री रहे। राज्य में वर्ष 2003 में हुए विधानसभा के पहले चुनाव में कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी से पराजित हो गई थी।

राज्य में कांग्रेस नेताओं से मतभेद के चलते जोगी ने वर्ष 2016 में नई पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) का गठन कर लिया था और वह उसके प्रमुख थे।

छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी का शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ ईसाई रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। जोगी का शुक्रवार को निधन हो गया था। बिलासपुर जिले के अधिकारियों ने बताया कि जिले के गौरला शहर के ज्योतिपुर स्थित ईसाई कब्रिस्तान में देर शाम जोगी के पार्थिव शरीर को दफनाया गया।

अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान कब्रिस्तान में जोगी की पत्नी रेणु जोगी, उनके बेटे अमित जोगी, उनकी पुत्रवधु ऋचा जोगी और अजीत जोगी के बड़े भाई एसआर जोगी मौजूद थे। वहीं रायपुर के बिशप और अन्य पादरियों ने जोगी के लिए प्रार्थना की।

उन्होंने बताया कि जोगी के अंतिम संस्कार के दौरान राज्य के आबकारी मंत्री कवासी लखमा, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

इससे पहले शनिवार सुबह जोगी के पार्थिव शरीर को रायपुर स्थित उनके निवास स्थान सागौन बंगले से बिलासपुर में उनके आवास मरवाही सदन ले जाया गया। जहां बिलासपुर के वरिष्ठ नेताओं और आमजनों ने उनके शव पर अपने श्रध्दासुमन अर्पित किए। वहीं रायपुर से बिलासपुर के रास्ते में अनेक गावों में लोगों ने जोगी के वाहन पर फूल बरसाए।

बाद में जोगी के पार्थिव शरीर को उनके गृहग्राम जोगीसार ले जाया गया। जहां ग्रामीणों और उनके क्षेत्र की जनता ने अपने नेता का अंतिम दर्शन किया। अंत में जोगी के शव को गौरेला लाया गया, जहां उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र थे। गौरेला के कब्रिस्तान में जोगी के शव को दफनाया गया।

अधिकारियों ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए बनाए गए नियमों के तहत केवल उनके करीबी परिवार के सदस्यों और गणमान्य लोगों ने ही कब्रिस्तान में प्रवेश किया था।



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)