Social Activists Protest In Ranchi After Nia Arrests Father Stan Swamy In Bhima Koregaon Case 2000 People Including Economist Jean Drez Issues A Statement – भीमा कोरेगांव मामले में फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी का विरोध, अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज सहित 2000 लोगों ने जारी किया बयान

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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भीमा कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में रांची से 83 वर्षीय कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। स्वामी की गिरफ्तारी के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। कुछ दिनों पहले स्टेन स्वामी ने कहा था कि छात्रों और कार्यकर्ताओं को अपनी असहमति व्यक्त करने पर जेल भेजा जा रहा है। 

जांचकर्ताओं ने कहा कि एल्गर परिषद के कार्यक्रम में भाषण दिए गए थे, जो कथित रूप से माओवादियों द्वारा वित्त पोषित था। इससे 1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव गांव के पास जातिगत झड़पें हुईं। दलित समूहों द्वारा व्यापक विरोध प्रदर्शनों में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। 

रिपोर्ट के मुताबिक नाम न बताने की शर्त पर एक एनआईए अधिकारी ने बताया कि स्वामी को पुणे के पास हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने स्वामी को 23 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया क्योंकि जांच एजेंसी ने उनकी रिमांड नहीं मांगी थी। अधिकारी ने बताया कि पुणे पुलिस और एनआईए द्वारा उनसे दो बार पूछताछ की गई थी और गुरुवार शाम को उन्हें उनके आवास से हिरासत में लिया गया था और बाद में प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के साथ कथित संबंधों के लिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 

रिपोर्ट के मुताबिक अपनी गिरफ्तारी से दो दिन पहले शूट किए गए एक वीडियो में, स्वामी ने कहा कि वह कभी भीमा कोरेगांव नहीं गए हैं, जिसके लिए उन्हें आरोपी बनाया जा रहा है। 

स्टेन स्वामी से रांची में सात अगस्त को दो घंटे पूछताछ की गई थी और बाद में उन्हें आगे की पूछताछ के लिए मुंबई के एनआईए कार्यालय में बुलाया गया था। हालांकि उन्होंने एजेंसी को सूचित किया था कि वह अपनी उम्र और कोरोना वायरस महामारी के कारण यात्रा नहीं कर सकते हैं।

एनआईए अधिकारी ने कहा कि सीपीआई (माओवादी) के साहित्य, प्रचार सामग्री और समूह के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए संचार से जुड़े दस्तावेज स्वामी के कब्जे से जब्त किए गए हैं। 

स्टेन स्वामी इस मामले में गिरफ्तार किए जाने वाला 16वें व्यक्ति हैं, जिसमें लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और आतंकवाद विरोधी कानून गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। भीमा कोरेगांव मामले की जांच एनआईए ने इस साल 24 जनवरी को शुरू की थी। 

एक बयान में, देश भर से लगभग 2,000 कार्यकर्ताओं ने 83 वर्षीय कार्यकर्ता की गिरफ्तारी की निंदा की और कहा कि यह कदम झारखंड में मानव और संवैधानिक अधिकारों के लिए काम करने वाले सभी लोगों पर हमला है।

राज्य में नागरिक समाज समूहों के एक निकाय, झारखंड जनाधिकार मंच ने एक बयान जारी कर कहा, “हम, यहां हस्ताक्षर करने वाले, 8 अक्तूबर 2020 की शाम को भीमा-कोरेगांव मामले में एनआईए द्वारा झारखंड के स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हैं। 84 साल के स्टेन स्वामी एक महत्वपूर्ण और देशप्रेमी नागरिक हैं, जिन्होंने झारखंड में दशकों से आदिवासी अधिकारों के लिए काम किया है।”  

अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर, वकील रेबेका जॉन और कार्यकर्ता अरुणा रॉय द्वारा हस्ताक्षरित बयान ने इस मामले को सरकार द्वारा ”आधारहीन और गढ़ा हुआ” करार दिया है।

बयान में कहा गया, “केंद्र सरकार, भीमा कोरेगांव मामले की आड़ में, इन कार्यकर्ताओं के खिलाफ एक राष्ट्रीय माओवादी साजिश का झूठा आख्यान बनाने की कोशिश कर रही है। इस मामले का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों, दलितों और हाशिए के लोगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले और सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सवाल उठाने वाले कार्यकर्ताओं को लक्षित करना और परेशान करना है। 



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